कूछ अजीब सा नशा है इस हवा मे
अपना ही गुरुर हे इस शहर मे
लोग भागते हे सिर्फ दो वक्त की रोटी कमाने के लिये
पार वक्त ही नाही हे पीछे मुडके देखणे के लिये
एक बार पीछे मुडके तो देखो
गुजरे हुये लम्हे को निहार के तो देखो
जिंदगी तो ऐसेही निकल जायेगी
जिंदगी जिने की कोई वजहखोजके तो देखो
उस वजह के साथ जिंदगी गुजार के तो देखो
वक्त तो हल्केसे निकाल जायेगा
और जो हात मी रेह जाये उसे निहर के तो देखो
बस
जिंदगी जिने के लिये कोई वजह खोजके तो देखो
बस
जिंदगी जिने के लिये कोई वजह खोजके तो देखो
---अव्यक्त
अपना ही गुरुर हे इस शहर मे
लोग भागते हे सिर्फ दो वक्त की रोटी कमाने के लिये
पार वक्त ही नाही हे पीछे मुडके देखणे के लिये
एक बार पीछे मुडके तो देखो
गुजरे हुये लम्हे को निहार के तो देखो
जिंदगी तो ऐसेही निकल जायेगी
जिंदगी जिने की कोई वजहखोजके तो देखो
उस वजह के साथ जिंदगी गुजार के तो देखो
वक्त तो हल्केसे निकाल जायेगा
और जो हात मी रेह जाये उसे निहर के तो देखो
बस
जिंदगी जिने के लिये कोई वजह खोजके तो देखो
बस
जिंदगी जिने के लिये कोई वजह खोजके तो देखो
---अव्यक्त
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