Wednesday, September 2, 2015

एक बार पीछे मुडके तो देखो

कूछ अजीब सा नशा है इस हवा मे
अपना ही गुरुर हे इस शहर मे
लोग भागते हे सिर्फ दो वक्त की रोटी कमाने के लिये 
पार वक्त ही नाही हे पीछे मुडके देखणे के लिये 

एक बार पीछे मुडके तो देखो 
गुजरे हुये लम्हे को निहार के तो देखो
जिंदगी तो ऐसेही निकल जायेगी 
जिंदगी जिने की कोई वजहखोजके तो देखो

उस वजह के साथ जिंदगी गुजार के तो देखो 
वक्त तो हल्केसे निकाल जायेगा 
और जो हात मी रेह जाये उसे निहर के तो देखो 
बस 
जिंदगी जिने के लिये कोई वजह खोजके तो देखो 
बस 
जिंदगी जिने के लिये कोई वजह खोजके तो देखो 

                                  ---अव्यक्त

No comments:

Post a Comment